डेबिट कार्ड धोखाधड़ी: सचेत रहें.. डेबिट कार्ड धोखाधड़ी का पता कैसे लगाएं?सुरक्षा के कुछ आसान तरीके…

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डेबिट कार्ड धोखाधड़ी: सचेत रहें

डेबिट कार्ड धोखाधड़ी तब होती है जब साइबर अपराधी, अनधिकृत लेन-देन के लिए इसके शिकार होनेवाले व्यक्ति के कार्ड नंबर और पिन पर गैरकानूनी ढंग से कब्जा कर लेता है। पीड़ित की जानकारी हासिल करने के ढेर सारे तरीके हैं, रीटेलर के असुरक्षित कंप्यूटर से गैरकानूनी ढंग से डेटा हासिल करने में धोखेबाज कर्मचारी से लेकर हैकर तक लगे हुए हैं। कपटपूर्ण लेनदेन के बाद एक बार जब खाते से धन की निकासी हो जाती है, तो यह की हुई गड़बड़ी मिटाने के लिए शिकार व्यक्ति को अनपेक्षित औपचारिकताओं के माध्यम से परख सकता है और धन पुनः खाते में जमा कर सकता है।

डेबिट कार्ड धोखाधड़ी का पता कैसे लगाएं?

डेबिट कार्ड धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए किसी विशेष दक्षता की कोई आवश्यकता नहीं। समस्याओं को जल्दी खोजने का सबसे आसान तरीका ऑनलाइन बैंकिंग के लिए साइन अप करना है। इसमें उपयोगकर्ता खाते के शेष और रोजाना हुए लेनदेनों की जांच कर सकता है। अगर इसमें कोई अस्वाभाविक लेनदेन हुआ है, तो पीड़ित व्यक्ति को तुरंत बैंक को कॉल करना चाहिए। डेबिट कार्ड लेनदेनों की रसीद का एक रिकार्ड रखना हमेशा एक सुरक्षित तरीका है, जिससे उन्हें बाद में ऑनलाइन लेनदेनों के साथ मिलाकर देखा जा सके।

वैकल्पिक रूप से, उपयोगकर्ता फोन बैंकिंग के जरिए सभी लेनदेनों पर नजर रख सकते हैं। कम से कम, बैंक के मासिक विवरण की बारीकी से ब्योरेवार समीक्षा की जानी चाहिए और खाते की शेष राशि की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए।

सुरक्षा के कुछ आसान तरीके

यह तो शायद संभव नहीं होगा कि हैकरों और अन्य चोरों पर कोई काबू पाया जा सके, लेकिन ऐसे कई तरीके हैं जिनसे स्वयं को शिकार बनने से बचा जा सकता है।

बैंकिंग एलर्ट लें: वर्तमान परिस्थितियों में बैंकिंग एलर्ट के लिए साइन अप करना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर खाते में कोई ऐसी संदेहास्पद गतिविधि होती है, जैसे निर्दिष्ट राशि से ज्यादा राशि निकालना या पते में कोई परिवर्तन करना तो बैंक पीड़ित व्यक्ति से ईमेल या टेक्स्ट संदेश द्वारा संपर्क कर सकता है।

कागज-रहित (पेपरलेस) लेन-देन करें: कागजरहित बैंक विवरण के लिए साइनिंग अप करने से आपके मेलबॉक्स से संवेदनशील बैंक खाते संबंधी जानकारियों के चोरी होने की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं। अगर आप अपने कूड़ेदान में मौजूद बैंक विवरणों तथा डेबिट कार्ड की रसीदों को तेज धार वाली कतरनी से काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर देते हैं तो इससे आपके बैंक खाते की सूचनाएं चोरी होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाती हैं।

डेबिट कार्ड से खरीदारी के दौरान सतर्कता: डेबिट कार्ड के माध्यम से किसी भी खरीदारी के दौरान प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए आवश्यक सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।

बैंक के एटीएम का इस्तेमाल ज्यादा करें: सुविधात्मक दुकानों, रेस्टोरेंटों और अन्य स्थानों पर अवस्थित एटीएम मशीनों की बजाय बैंक के एटीएम में सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था (वीडियो कैमरा) की संभावना रहती है। इसके अलावा, बैंक की कार्यावधि के बाद बैंक के एटीएम के इस्तेमाल से सतर्कतापूर्वक परहेज करना चाहिए।

पुराने डेबिट कार्ड नष्ट कर दें: धोखाधड़ी से बचने का यह भी एक बुद्धिमान तरीका है। यद्यपि, बहुत से बैंक अब ‘चिप तथा पिन’ कार्ड मुहैया कराते हैं। जब भी उपयोगकर्ता एक नया कार्ड प्राप्त करता है और अपना पहला लेनदेन करता है, तो बैंक यह सुनिश्चित कर देते हैं कि पुराने डेबिट कार्ड की वैधता स्वतः निरस्त हो जाए और उपयोगकर्ता किसी भी बैंकिंग धोखाधड़ी से सुरक्षित रहे।

अपनी सभी धनराशि एक ही स्थान पर न रखें: हालांकि यह जाहिरा तौर पर एक बुद्धिमत्तापूर्ण काम तो नहीं लगेगा, लेकिन उपयोगकर्ता की वित्तीय आवश्यकताओं के लिहाज से यह एक बेहतर तरीका है। अगर उपयोगकर्ता का खाता किसी तरीके से गड़बड़ी का शिकार हो गया हो तो, वह इसके माध्यम से कम से कम उस समय तक तो अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकता है, जबतक समस्या का समाधान नहीं हो जाता है। आपातकालीन बचत खाते को अन्य खातों से लिंक करना भी एक बेहतर तरीका है।

अपना पिन नियमित रूप से बदलते रहें: साइबर अपराधी अब बहुत होशियार हो गए हैं। इसके लिए एटीएम पिन को हर माह बदलने की आदत एक सरल और विश्वसनीय तरीका है। ज्यादातर बैंकों में इसका प्रावधान है, जिससे उपयोगकर्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

अपने फोन में अपना पिन न रखें: कभी-कभी भुलक्कड़ किस्म के लोग अपना पिन अपने मोबाइल में सेव कर लेते हैं जो किसी भी तरह सुरक्षित नहीं है। चोर आपके फोन में सुरक्षित की हुई जानकारियों तक पहुंचने के लिए आपके फोन में सेंध लगा सकते हैं। अगर वे इस प्रकार की संवेदनशील सूचनाएं जानने में सफल हो गए, तो पहचान की चोरी की संभावना बढ़ जाती है।

फिशिंग धोखाधड़ी से सावधान रहें: ई-मेल चेक करते हुए, उपयोगकर्ता को हमेशा ई-मेल के स्रोत/ प्रेषक की जांच करनी चाहिए। संदेहास्पद/ अनजान स्रोतों से आनेवाले ई-मेल तुरंत नष्ट कर दिए जाने चाहिए।

अपने कंप्यूटर को सुरक्षित करें: ई-स्कैन जैसे अनुशंसित एंटी-वायरस तथा एंटी-स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर के उपयोग से कंप्यूटर, लैपटॉप तथा अन्य उपकरणों को मेलवेयर के हमले से सुरक्षित किया जा सकता है। इसे नियमित रूप से अद्यतन करते रहने से किसी भी तरह की गड़बड़ी होने की संभावना को समाप्त किया जा सकता है।

सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करें: जब ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन करना हो, तो उपयोगकर्ता को सतर्क रहना चाहिए कि यह किसी सार्वजनिक स्थान या किसी असुरक्षित नेटवर्क के जरिए न किया जाए। जिससे उपयोगकर्ता परिचित हो, ऐसे सुरक्षित नेटवर्क के इस्तेमाल से किसी भी तरह की धोखाधड़ी की संभावना से बचा जा सकता है।

अगर यह आपके साथ घटित हो तो क्या करना चाहिए?

अगर किसी के डेबिट कार्ड की सूचनाएं चोरी हो जाएं, तो चोर द्वारा होनेवाली हानि को कम से कम करने के लिए, बैंक से तुरंत संपर्क किया जाना चाहिए। इसके बाद की कार्रवाई के तौर पर एक विस्तृत पत्र लिखा जाना चाहिए, जिसमें बैंक के उस कर्मचारी का पूरा विवरण दिया गया हो जिसके साथ जालसाजी वाले लेनदेन पर चर्चा की गई थी। बैंक से ऐसे किसी भी एनएसएफ शुल्क को माफ करने का अनुरोध भी किया जाना चाहिए, जो किसी धोखाधड़ी तथा निकासी की गई राशि को खाते में वापस लाने के लिए आरोपित किया जा सकता है।

अगर बैंक का रुख सहयोगात्मक नहीं है, तो उपयोगकर्ता किसी वैध उपभोक्ता हिमायती समूह की मदद ले सकते हैं, यद्यपि यह संबंधित बैंक के प्रकार पर निर्भर करता है। उन्हें धोखाधड़ी के बारे में सूचना और जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे आवश्यक कदम उठाए जा सकें। भुगतानों के पुनर्निर्धारण से पीड़ित को थोड़ी राहत मिल सकती है। ऊपर वर्णित सभी एहतियाती उपायों से खाते की सुरक्षा होगी और किसी डेबिट कार्ड धोखाधड़ी का शिकार बनने की संभावनाएं कम से कम होंगी।

 

Mr. Govind Rammurthy, MD & CEO, eScan

sujata.bk@changeagents.in

SHARAD LONKAR
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पुण्याचे स्वतंत्र ,पहिले,ऑनलाइन मराठी न्यूज पोर्टल.. http://mymarathi.net/ पुणे महापालिकेची मुख्य सभा लाईव्ह करणारे सर्वात पहिले न्यूज पोर्टल .. C.G.Registration No.MSME/ MH- 26-0179354,M.G. RC No. DCL 2131000315798079 मालक-संपादक : शरद लोणकर( mobile-9423508306) sharadlonkarpune@gmail.com - State Committe Member Of Digital Media Editor Journalist Association Maharshtra *1984 पासून पुण्यात पत्रकारिता, *आजीव सभासद - अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडळ, *आजीव सभासद - महाराष्ट्र साहित्य परिषद, *पुण्याच्या रस्त्याखाली ३० फुट खोल उतरून पेशवेकालीन भुयारी पाणीपुरवठा यंत्रणेचा प्रत्यक्षात माग काढणारा पहिला पत्रकार म्हणून मान मिळविला ... *स्वातंत्र्य वीर सावरकर यांचे नातू प्रफुल्ल चिपळूणकर हे सारस बागेजवळ भिक्षुकाच्या अवस्थेत दुर्लक्षित जिवन जगत असल्याचे सर्वप्रथम निदर्शनास आणून दिले *इराक मध्ये अडकलेल्या भारतीय मजुरांची सुटका होण्यासाठी विशेष प्रयत्न -लातूर मधील ५ तरुणांची सुटका . *निगडीतील २ महिन्यात दुप्पट पैसे देणाऱ्या सनराईज कन्सल्टन्सी च्या तथाकथित एल टीटीइ हस्तकाचा पर्दाफाश-संबधित फरार https://www.facebook.com/MyMarathiNews/

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